Sharadiya Navratri 2021: MP के इस मंदिर में भक्तों को सुबह से शाम तक तीन रूपों में होते हैं माता के दर्शन

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Sharadiya Navratri 2021: MP के इस मंदिर में भक्तों को सुबह से शाम तक तीन रूपों में होते हैं माता के दर्शन

Sharadiya Navratri 2021: पेटलावद (नईदुनिया न्यूज)। सनातन धर्म में देवी का वास मुख्य रूप से पहाड़ों पर माना गया है, तभी तो पहाड़ों वाली माता का नाम भी उन्हें दिया गया है। ऐसे में आज हम आपको पहाड़ों में बने देवी मां के एक ऐसे ही प्रमुख मंदिर के बारे में बता रहे हैं जिनके बारे में माना जाता है कि यहां आज भी चमत्कार होते हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं पश्चिमी मप्र के झाबुआ जिले के पेटलावद-रायपुरिया के बीच मां भद्रकाली मंदिर की। मां भद्रकाली के इस प्राचीन मंदिर में जो दो मूर्तियां हैं, वे चमत्कारी बताई जाती हैं।

यह है मान्यता

पंडित दशरथ भारती ने बताया कि मान्यता है कि दिन में माताजी की ये मूर्तियां तीन बार स्वरूप बदलती हैं। सुबह से 12 बजे तक मां बाल अवस्था, दोपहर को युवा और शाम छह से अगले दिन सूर्योदय तक वृद्ध रूप धारण कर दर्शन देती हैं। इस बदलाव को केवल भक्त ही अनुभव कर सकते हैं। इसके चलते पेटलावद क्षेत्र ही नहीं, आसपास के जिलों से भी श्रद्धालु माता के दरबार में मत्था टेकने पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं के बीच माता के तीन स्वरूप के दर्शन करने की लालसा रहती है, तो तीनों पहर रुककर माता के दर्शन कर मन्नत मांगते हैं। माता की महिमा निराली है। सधो मन की गई मनोकामनाएं भी पूर्ण करती हैं।

नवरात्र पर होती है विशेष पूजा-अर्चना

नागरिक कन्हैयालाल भटेवरा ने बताया कि चाहे चैत्र नवरात्र हो या शारदीय नवरात्र हो, इस मंदिर पर विशेष पूजा-अर्चना का दौर चलता रहता है। शारदेय नवरात्र के दौरान रोजाना माताजी का विशेष श्रृंगार व पूजा-अर्चना की जा रही है। रायपुरिया-पेटलावद के मुख्य मार्ग पर होने से यहां भक्तों का तांता लगा रहता है। ऊंची घाटी पर स्थित इस मंदिर के ठीक नीचे कलकल बहती हुई पंपावती नदी का सौंदर्य देखते ही बनता है। रायपुरिया में प्रतिवर्ष लगने वाला मवेशी मेला इन्हीं माताजी के नाम से भराता है।

Sharadiya Navratri 2021: MP के इस मंदिर में भक्तों को सुबह से शाम तक तीन रूपों में होते हैं माता के दर्शन

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पैदल जाते हैं दर्शनार्थी

नागरिक कमलेश शर्मा ने बताया कि नवरात्र में हजारों श्रद्धालु प्रतिदिन सुबह-शाम के समय पैदल दर्शन करने जाते हैं। यह क्रम पहले दिन से ही प्रारंभ हो गया है। यह स्थल पेटलावद नगर से लगभग तीन किमी दूर पहाड़ी पर स्थित है। सामने से गहरी खाई में पंपावती नदी भी बहती है जो मंदिर की सुंदरता को बढ़ाती है। हालांकि इसके विकास को लेकर कोई योजना नहीं बन पाई है। इसे लेकर रायपुरिया क्षेत्र के ग्रामीणों और अन्य लोगों से सहयोग लेकर मंदिर जीर्णोद्धार को लेकर प्रयास कर रहे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन और पुरातत्व विभाग इस ओर उदासीन बना हुआ है।

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शर्मा का कहना है कियह मंदिर करीब पांच सौ साल पुराना है। तब से आज तक केवल दो बार ही मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ है। पहली बार 1372 ईस्वी में राजस्थान से आए भटेवरा समाज और दूसरी बार नगर के राजपरिवार द्वारा। इस मंदिर के पीछे भी एक कहानी प्रचलित है। कहते हैं कि पंपापुर सरोवर किनारे भीम की पत्नी हड़प्पा ने नरबलि रोकने के लिए माताजी को यहां प्रसन्ना किया था, क्योंकि घटोत्कच भीम की बलि चढ़ाना चाहता था। समीप बहने वाली नदी का नाम भी इसीलिए पंपावती पड़ा है।

Posted By: Nai Dunia News Network

Sharadiya Navratri 2021: MP के इस मंदिर में भक्तों को सुबह से शाम तक तीन रूपों में होते हैं माता के दर्शन

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